Uniform civil code जिसे हिंदी में समान नागरिक संहिता काहा जाता है।  

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इसका सीधा सा मतलब है कि एक ऐसा कानून जो सभी धर्मों के लिए समान होगा और उसका पालन सभी लोगों को करना होगा। 

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ताकि कानून के नजर में सभी धर्म के लोग एक समान हो और इस कानून के आने से न्यायपालिका के ऊपर जो बोझ है उसे कम किया जा सकता है।  

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सबसे अहम बात है कि आज भी भारत में मुस्लिम, ईसाई और अन्य पार्टी अपने धर्म से जुड़े हुए सभी प्रकार के आवश्यक चीज 

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जैसे शादी-विवाह, गोद लेना जैसी चीजों के लिए अपने पर्सनल लॉ बोर्ड के पास जाते हैं। 

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इसके अलावा भारत में हिंदू और सिख बौद्ध धर्म के लोग सिविल कानून के अंतर्गत आते हैं। 

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इसलिए देश में सभी धर्मों के लिए अलग कानून होने के कारण न्यायपालिका पर बहुत ज्यादा दबाव पड़ता है।  

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अगर देश में यूनिफॉर्म सिविल कोड आता है तो न्यायपालिका को अपना फैसला सुनाने में कम समय लगेगा।  

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सिविल यूनिफॉर्म सिविल कोड संविधान के 40वे अनुच्छेद के अंतर्गत आता है 

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जिसके अंतर्गत संविधान में इस बात की व्यवस्था है कि हर एक राज्य को अपने राज्य में सिविल यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करना चाहिए।  

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लेकिन आज की तारीख में भारत के केवल गोआ में ही सिविल यूनिफॉर्म सिविल कोड कानून लागू किया गया है। 

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बाकी राज्यों में इस कानून को अभी तक लागू नहीं किया गया है।  

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