आचार्य चाणक्य द्वारा रचित चाणक्य नीति युवाओ के बीच में काफी प्रसिद्ध हैं।

अधिकतर युवा अपने जीवन में सफ़लता पाने के लिए चाणक्य द्वारा बताए गए नीतियों का पालन करते हैं। 

चाणक्य नीति में कुछ श्लोक आता जिसके माध्यम से उन्होने मूर्ख और ज्ञानी के बीच के अंतर को समझाया हैं । 

स्वगृहे पूज्यते मूर्खः स्वग्रामे पूज्यते प्रभुः । स्वदेशे पूज्यते राजा विद्वान्सर्वत्र पूज्यते ।।

स्वगृहे पूज्यते मूर्खः अथार्त मुर्ख व्यक्ति को केवल उसके घर में सम्मान और आदर प्राप्त होता हैं।

स्वग्रामे पूज्यते प्रभुः । अथार्त एक मुखिया का आदर सम्मान और पूजा केवल उसके गावं में ही होता हैं।

स्वदेशे पूज्यते राजा अथार्त  एक राजा को केवल उसके राज्य और उसके देश में ही पूजा जाता हैं,

विद्वान्सर्वत्र पूज्यते ।। अथार्त  एक विद्वान व्यक्ति की आदर और सम्मान पुरे संसार में होती हैं पूरा संसार उसकी पूजा करता हैं। 

इसीलिए जीवन में कभी भी ज्ञान से दूर नहीं भागना चाहिए।  

काव्यशास्त्रविनोदेन कालो गच्छति धीमतां । व्यसनेन च मूर्खाणां निद्रया कलहेन वा ।

आचार्या चाणक्य अपने अगले श्लोक में कहते हैं " ज्ञानी व्यक्ति अपना पूरा समय काव्य और शास्त्रो के अध्ययन में बिताता हैं । 

वही मूर्ख और अज्ञानी लोग अपना पूरा समय सोने, लड़ने और बुरी आदतों को पीछा करने में बिताता हैं ।

इसीलिए हर व्यक्ति को अपना समय व्यर्थ के कार्यो से हटाकर रचनात्मक कार्यो में लगाना चाहिए । 

चाणक्य नीति: ऐसे स्वभाव वाले स्त्री से रहे सावधान !