नासा और इसरो मिलकर बना रहे हैं सबसे महंगा सैटेलाइट  

चंद्रयान-3 के सक्सेस के बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी कि इसरो दूसरे कई मिशन पर तेजी से काम कर रहा है। 

एक मिशन के सक्सेसफुल होने पर किसी भी अंतरिक्ष एजेंसी की ताकत पूरी दुनिया देखती है। 

यह इसरो और नासा का ज्वाइंट मिशन (Isro and Nasa Joint Mission) है, जिस पर अभी काम चल रहा है।  

ऐसा पहली बार है जब नासा और इसरो ने पृथ्वी-अवलोकन मिशन के लिए हार्डवेयर विकास पर सहमति जताई है।  

निसार मिशन का उद्देश्य  

निसार मिशन (Nisar Mission) 12 दिनों में पूरी दुनिया की मैपिंग यानी कि मानचित्रण करेगा  

और पृथ्वी के इकोसिम्स्टम, वनस्पति बायोमास, बर्फ द्रव्यमान, समुद्र के लेवल में वृद्धि, सुनामी और ज्वालामुखी, भूजल और 

भूकंप समेत प्राकृतिक खतरों में होने वाले बदलाव को समझने के लिए स्थानिक और अस्थायी तौर पर जानकरी देगा। 

इसलिए खास है निसार मिशन 

अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो की धाक दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। इसके साथ ही इसरो द्वारा बनाए गए रॉकेट पर अब पूरी दुनिया को भरोसा हो गया है।  

निसार का पूरा नाम नासा-इसरो एपर्चर रडार यानी कि (NASA-ISRO Synthetic Aperture Radar satellite) है।  

बता दें कि इसका वजन 2600 kg है। इस मिशन की लागत लगभग 12,000 करोड़ रुपए है। इसे स्पेस में स्थापित किया जाएगा।  

निसार मिशन सुनामी, भूकंप, ज्वालामुखी और भूस्खलन जैसे नेचुरल डिजास्टर्स की जानकारी और भविष्यवाणी करने में मदद करेगा। 

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