एक बार फिर मंगल पर जाने की तैयारी कर रहा है ISRO  

भारतीय स्पेस एजेंसी इसरो ने पहले ही प्रयास में इस लाल ग्रह की कक्षा में एक स्पेसक्राफ्ट को सफलतापूर्वक स्थापित कर इतिहास रच दिया था।

अब उसके नौ साल बाद एक बार फिर मंगलयान (Mangalyaan) भेजने की तैयारी कर रहा है। इसरो के अधिकारियों ने बताया है कि भारत का दूसरा मार्स ऑर्बिटर मिशन-2 चार पेलोड ले जाएगा। 

मंगलयान के साइंटिस्ट इंस्ट्रूमेंट्स मंगल ग्रह के अलग अलग पहलुओं का अध्ययन करेंगे। जिसमें ग्रहों के बीच की धूल, मंगल ग्रह का वातावरण और पर्यावरण शामिल हैं।

मंगलयान-2 की लॉन्चिंग कब होगी?

आपको बता दें कि अभी मंगलयान-2 (Mangalyaan 2) की लॉन्चिंग इसरो की प्राथमिकता में नहीं है। मंगलयान-2 मिशन की लॉन्चिंग साल 2025 तक टाल दी गई है।

इसरो का कहना है कि अभी इस प्रोजेक्ट पर काम किया जा रहा है और तैयारियां आगे बढ़ रही हैं।

स्पेस एजेंसी ने बताया है कि अभी अंतरिक्ष में पहले इंसान को भेजने के मिशन गगनयान पर काम किया जा रहा है।

क्या है मंगलयान 2 का मकसद?

मार्स ऑर्बिटर मिशन-2 यानी कि मंगलयान 2 के अंतर्गत चार पेलोड की मदद से मंगल ग्रह के पहलुओं का अध्ययन किया जाएगा।

यदि हम मार्स ऑर्बिट डेस्ट एक्सपेरिमेंट (MODEX) की बात करें, तो उसे मंगल ग्रह के ऊंचाई वाले इलाकों को खोजने के लिए बनाया गया है।

वहीं, रेडियो ऑकल्टेशन (RO) एक्‍सपेरिमेंट की सहायता से मंगल ग्रह की इलेक्‍ट्रॉन डेंसिटी के बारे में पता लगाया जाएगा।

दूसरी तरफ, एनर्जेटिक आयन स्पेक्ट्रोमीटर (EIS) का काम सोलर एनर्जी पार्टिकल्‍स और सुपर थर्मल विंड पार्टिकल्‍स को स्‍टडी करना होगा।

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