आचार्य चाणक्य ने चाणक्य नीति के एक श्लोक में बताया कि कुछ ऐसे मामले हैं जिसमें स्त्रियां पुरुषो से कई गुना आगे रहती हैं।

महिलाओं के इन गुणों के सामने पुरुष भी नतमस्तक हो जाते हैं। 

ओ श्लोक हैं  स्त्रीणां दि्वगुण आहारो बुदि्धस्तासां चतुर्गुणा। साहसं षड्गुणं चैव कामोष्टगुण उच्यते।।

तो चलिए इस श्लोक का मतलब समझते हैं।

1. आचार्य चाणक्य के  श्लोक के अनुसार स्त्रियाँ पुरुषों से 6 गुना ज्यादा साहसी होती हैं।

संकट के समय में स्त्रियाँ तनाव लेने के बजाय उसका डटकर सामना करती हैं।

2. आचार्य चाणक्य ने कहाँ कि पुरुषों के मुकाबले स्त्रियाँ ज्यादा समझदार होती हैं।

यही कारण कि आचार्य चाणक्य महिलाओं को अपना गुप्तचर (झासुस) बनाते थे।

3. भावुकता में महिलाएं पुरुषों से कई गुणा ज्यादा आगे होती हैं। महिलाएं छोटी - छोटी बात पर इमोशनल हो जाती हैं।

लेकिन ये उनकी कमजोरी नहीं अंदरूनी ताकत हैं।

4. आचार्य चाणक्य कहते हैं कि महिलाओं को पुरुषों के मुक़ाबले ज्यादा ऊर्जा की जरुरत पड़ती हैं, इसीलिए उन्हें ज्यादा भूख भी लगाती हैं। 

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