चाणक्य नीति: अगर सम्मान चाहिए तो आज ही डाले ये आदते  

आचार्या चाणक्य कहते हैं जिसका कोई संतान नहीं हैं उसका घर उजार हैं । 

जिसका कोई संबंधी ही नहीं हैं उसका सभी दिशए उजार हैं । 

मूर्ख व्यक्ति का ह्रदय उजार हैं। निर्धन व्यक्ति का तो सबकुछ ही उजार हैं ।  

जिस आध्यात्मिक सीख का आचरण नहीं किया जाता वह जहर हैं । 

जिसका पेट खराब हैं उसके लिए भोजन जहर समान हैं । 

निर्धन व्यक्ति के लिए लोगो के किसी सामाजिक या व्यक्तिगत कर्यक्रम में एकत्र होना जहर हैं ।  

जिस व्यक्ति के पास धर्म और दया नहीं हैं उसे अपने से दूर करो । जिस गुरु के पास आध्यात्मिक ज्ञान नहीं हैं उसे भी दूर करो ।  

यहाँ तक की जिस पत्नी के चेहरे पर हर वक्त घ्रीणा हैं उसे दूर करो । जिन रिसतेदारों के पास प्रेम नहीं उन्हे दूर करो ।  

अगर घोड़े को हर वक्त बांध कर रखा जाए तो वह बहुत जल्द बूढ़ा हो जाता हैं । 

अगर स्त्री अपने पति के साथ प्रणय नहीं करती वह भी बहुत जल्द बूढ़ी हो जाती हैं । 

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