आचार्य चाणक्य ने चाणक्य नीति शास्त्र के प्रथम अध्याय के श्लोक में कुछ ऐसे लोगों के बारे में बताए हैं

जिन पर आंख बंद करके कभी भी विश्वास नहीं करना चाहिए।

 तो चलिए उस श्लोक को देखते हैं और मतलब समझते हैं।

नखीनां च नदीनां च शृंगीणां शस्त्रपाणिनाम् . विश्वासो नैव कर्त्तव्यः स्त्रीषु राजकुलेषु च ॥

आचार्य चाणक्य कहते हैं कि लंबे नाखून वाले हिंसक पशु जैसे शेर, भालू, बाघ और तेंदुआ पशु पर कभी भी विश्वास नहीं किया जा सकता।

1. लंबे नाख़ून वाले हिंसक पशु। 

क्योंकि ऐसे जानवर कब आप पर हमला कर दे यह कोई नहीं जानता हैं।

आचार्य चाणक्य कहते हैं कि शस्त्रधारी व्यक्ति यानि जिनके पास हथियार होता हैं , उनलोगों पर कभी भी विश्वास नहीं करना चाहिए।

2. शस्त्रधारी व्यक्ति

 क्योंकि न जाने कब उनके मन में आपका अहित करने का विचार आ जाये।

आचार्य चाणक्य कहते हैं कि कभी भी राज - परिवार के लोगों विश्वास नहीं करनी चाहिए।

3. राज्य-परिवार से सम्बंधित लोग।

क्योंकि वे लोग सत्ता पक्ष से जुड़े होने के कारण कूटनीति में महारथ हासिल कर चुके होते हैं।

उदहारण : जैसे कंस मथुरा के राजा बनने के लिए अपने पिता उग्रसेन को बंदी बनाकर जेल में डाल दिया था।

और माता देवकी के आठवें पुत्र भगवान श्री कृष्ण से अपने प्राणों की रक्षा करने के माता देवकी सहित उनके पति वसुदेव को जेल डाल दिया था।

इसीलिए राज परिवार पर कभी भी विश्वास नहीं करना चाहिए क्योंकि कब बेटा, बाप  का शत्रु बन जाये ये कोई नहीं जानता हैं।

आचार्य चाणक्य कहते हैं यदि आपको कोई नदी पार करना हो तो आपको किसी व्यक्ति से यह नहीं पूछना चाहिए कि

4 नदियां

इस नदी की गहराई कितनी हैं अथवा इसकी प्रवाह कैसी हैं। क्योंकि कोई नदी के गहराई तक नहीं गया होता हैं।

 इसीलिए इन बातों पर विश्वास नहीं करना चाहिए। और अपने सूझ बुझ से काम लेना चाहिए।

आचार्य चाणक्य कहते हैं कि सींग वाले पशु पर भी कभी विश्वास नहीं करना चाहिए।  

5. सींग वाले पशु

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