अगर बनना हैं जीवन में सफल तो आज ही इन 3 आदतों को त्याग दे।

हर व्यक्ति सफलता का कामना करता हैं इसके लिए वह कड़ी मेहनत भी करता हैं।

अगर आप भी अपने जीवन में सफल इंसान बनना चाहते हैं तो आचार्य चाणक्य के इन तीन बातों को ध्यान में जरूर रखें।

दुराचारी च दुर्दृष्टि: दुराऽऽवासी च दुर्जनः। यन्मैत्री क्रियते पुम्भिर्नरः शीघ्र विनश्यति॥

आचार्य अपने इस श्लोक में कहते हैं कि बुरे कर्म करने वाले लोगो से दूर रहना चाहिए। 

यदि आप बुरे कर्म करने वाले के संगति में रहेंगे तो आप भी एक बुरे व्यक्ति बन जायेंगे। 

संत के संगत से व्यक्ति में सात्विक विचारधारा आती हैं। 

वही, बुरे लोगो के संगत से व्यक्ति बुरा बन जाता हैं। इसीलिए बुरे लोगो से हमेशा दुरी बना के रखे।

आचार्य आगे कहते हैं कि बिना किसी कारण के किसी को नुकसान पहुंचने वाले लोगो से भी सावधान रहना चाहिए। 

छल, कपट, और बिना किसी कारण के मानसिक और शारीरिक तथा आर्थिक नुकसान पहुंचाने वाले लोगो से सावधान रहना चाहिए। 

आचार्य आगे कहते कि दूषित जगहों पर नहीं रहना चाहिए। अगर आप दूषित और गन्दी इलाके में रहते है तो आप बीमार हो सकते हैं।

साथ ही मानसिक रूप से विचलित भी हो सकते हैं। इन्हीं तीन आदतों को आपको त्यागना हैं। 

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